मित्रो,
सभी आदरणीय गुरुजनों को सादर नमन
करता हूँ और इस परम पुनीत दिवस के पर
सभी को बधाई एवं सुभकामनाएँ देता हूँ l
शिक्षक दिवस पर कुछ पंक्तियाँ लिखने का प्रयास कर रहा हूँ l
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गुरू के ज्ञान बिन मंजिल, न मिलती जिंदगानी में,
गुरू ही मार्ग दर्शक है, जिंदगी की कहानी में l
गुरू होता पिता भी है, गुरू माता भी होता है,
गुरू पतवार जीवन की, पड़ी मुश्किल में खेता है l
गुरू के रूप में पहली गुरू माता ही होती है,
हमारी जिंदगी के हर, कदम पर साथ देती है l
हमारे लब्ज से माँ बोलना, वो ही सिखाती है,
दूसरा शब्द पापा के लिए कहना सिखाती है l
हमारे नन्हे हाथों को पकड़ कर घर के आँगन में,
कदम के बाद फिर दूजा कदम रखना सिखाती है l
हमारे संस्कारों को, हमारी जिंदगी में लाकर
हमें दिनरात उठना बैठना, चलना सिखाती है l
गुरू के रूप में दूजा गुरू अपना पिता होता,
हमारी जिंदगी की मंजिलों की तस्बीर है होता l
स्वयं अपने छिपा दर्दों को मेरे ख्वाब बोता है,
हमारी राँह के काँटे स्वयं ही वो हटाता है l
गुरू के रूप में तीजा गुरू गुरुकुल में मिलता है,
हमारे ज्ञान के आधार का वो आयाम होता है l
सार्थक जिंदगी के मंत्र सारे वो बताता है,
सफलता हर कदम चूमे, यही आशीष देता है l
स्वयं श्रीराम भी गुरू आश्रम में जाके सीखे थे,
गुरु की ही कृपा से तो धनुष औ बाण सीखे थे l
पिता, माता, प्रजा के प्रति उचित सम्मान सीखे थे,
धर्म के प्रति उचित सम्मान आदर भाव सीखे थे l
गुरू संदीपनी के आश्रम में जाकर के गिरधर ने,
स्वयं जीवन कला के साथ हर संस्कार सीखे थे l
स्वयं बनकर गुरु अर्जुन के गीता को सुनाया था,
अधर्मी कौरवों का कुल समूचा ही मिटाया था l
अगर होते नहीं चाणक्य जैसे मौर्य के गुरवर,
हमारे देश के इतिहास में बदलाव न होता l
स्वर्ण युग रूप में उस काल का इतिहास न होता,
विदेशी कुछ लुटेरों का यहाँ भय काल ही होता l
गुरु स्थान तो भगवान से भी बढ़ के होता है,
गुरू ही मुक्ति पाने का प्रमुख आयाम होता है l
ॐ जय गुरुवे नमः..........
.................................रामसनेही " सजल "


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