Monday, September 14, 2020

विगत बीस माह‌ के तत्कालीन पुलिस मुखिया पूनम के घाओं को भर रहे सत्येन्द्र कुमार सिंह पचास दिन ही जनपद में गुजार पाये

अब विजय ढुल कानून व्यवस्था पटरी पर लाने हेतु आश्वस्त हैं 


डाक्टर अखलाक अहमद खां

लखीमपुर खीरी। विगत 21 महीने में दो दो पुलिस अधीक्षकों की हुई छुट्टी से जिले का पूरा पुलिस मोहकमा सकते में है। यूं तो नवागत पुलिस अधीक्षक विजय ढुल पूरे जनपद की ध्वस्त कानून व्यवस्था पटरी पर लाने के लिए पूरी तरह से आस्वस्त हैं। 20 माह के अपने कार्य काल में कोतवाली एवम थानों को स्वतन्त्र रखने वाली श्रीमती पूनम के कार्यकाल में नामालूम कितने निर्दोष जेल में ठूंस दिए गए थे। चर्चा है कि श्रीमती पूनम के कार्यकाल में पूरा मोहकमा आजाद हो गया था। धन उगाही करके फर्जी मुकदमे लिखे जाते थे। शिकायत ‌करने पर तत्कालीन पुलिस मुखिया चोर दरवाजे से जांच क्षेत्राधिकारी को सौंप कर ठंडे बस्ते में गुम करा देतीं थीं। तत्कालीन पुलिस अधीक्षक की शिकायतों पर प्रदेश सरकार ने संज्ञान लेते हुए श्रीमती पूनम का स्थानांतरण सेनानायक आगरा में करके ,सत्येन्द्र कुमार सिंह की तैनाती जनपद पुलिस मुखिया के पद पर कर दी थी। जनपद की लुंज-पुंज कानून व्यवस्था को सुधारने में लगे सत्येन्द्र कुमार सिंह के कार्यकाल में अपराधों का तूफान आ गया। प्रतिदिन हत्यायें नाबालिग बच्चियों के साथ बलात्कार के बाद हत्या जैसी घटनाओं ने पूरे प्रदेश सरकार को झकझोर कर रख दिया था। यूं तो सत्येन्द्र कुमार सिंह ने अपने कार्यालय में हुई घटनाओं को 12 से 24 घंटे के भीतर ही ‌में उजागर करके कानून व्यवस्था को पटरी पर लाने का भरसक प्रयास किया था। सत्येन्द्र कुमार सिंह के पचास दिन के कार्यकाल में लग-भग साढ़े तीन दर्जन से अधिक घटित घटनाओं में कोतवाली सदर से संबद्ध पुलिस चौकी राजापुर के ग्राम भटपुरवा निवासिनी 12 वर्षीय बिटिया के साथ गन्ने के खेत में हुए  बलात्कार का गलत खुलासा करते हुए बबलू जो बिटिया को जिला महिला अस्पताल में भर्ती कराने लाया भी था।खाकी वर्दी के दबाव में मां बेटी को दी‌ गयी धमकियों के बाद बबलू को जेल भेज दिया था। जिसकी कसक आज भी ग्रामीणों में देखने को मिलती है। यही नहीं थाना सिंगाही में हुए तीन शाल की मासूम बच्ची जिसका 4 सितम्बर 20को अपहरण‌ के बाद गन्ने के खेत से शव बरामद कर के पुलिस ने पोस्टमार्टम हेतु जिला मुख्यालय भेज दिया था। जहां पोस्टमार्टम कर रहे चिकित्सकों के पैनल ने मासूम बच्ची के साथ बलात्कार की पुष्टि करते हुए गला दबाकर मार डालना बताया था। पूरे जनपद में हो रहे ताबड़तोड़ अपराधों से बौखलाए तत्कालीन पुलिस मुखिया सत्येन्द्र कुमार सिंह ने  पहले से रंजिश रखने वाले लेखराज को मुलजिम बना कर फर्जी जेल भेज दिया था।

जिससे से छुबध परिवार व ग्रामीणों ने धरने पर बैठ कर एस ओ सिंगाही के निलंबन की मांग कर रहे हैं ,धरना जारी है।

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